प्रकाशा-शराब बंद नहीं तो गाँव बंद होगा

१८ नवंबर २०१८ को गाँव में हुई फिर एक बार ग्रामसभा जिसमे गाँव के सभी आदिवासी बाँधन और अन्य गाँव के लोग मौजूद थे. इस ग्राम सभा का कारण था की कई महीनों से चल रहे शराब प्रतिबंध पर कोई सुनवाई या कार्यवाही नहीं हो रही है. इससे गाँव के लोग परेशान है. ना इसमे अब तक शासन हस्तक्षेप करता नजर आरहा है, ना की गाँव के अन्य लोग. इस सभा में गाँव शराब प्रतिबंध पर उपाय और सलाह देने के लिए प्रकाशा गाँव के सरपंच भावाडू भील और पड़ोंसी गाँव मोड़ में रहने वाले कुछ सामाजिक कार्यकर्ता और प्रकाशा गाँव के लोग और महिलाएं उपस्थित थी.

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शराब पर प्रतिबंध नहीं तो गाँव बंद और रास्ता रोको आंदोलन होगा

क्या करना चाहिए इसपर उपाय?

इस सभा में तय हवा की किस तरह शराब प्रतिबंध के लिए कमिटी बनानी है और इस कार्य की योजना कैसी करनी चाहिए. उसीके बाद चर्चा हुई की आज तक दिए गए सभी आवेदनों पर कोई हार्यवाही होती नजर नहीं आरही है. कुछ दिन पहले ही गाँव वालों ने शराब प्रतिबंध के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव किया, ग्राम पुलिस को निवेदन दिया, पुलिस निरीक्षक को निवेदन दिया, पुलिस निरीक्षक, जिल्हाधिकारी ऐसे सभी अधिकारियों के दारु प्रतिबंध के लिए उनके पास गए लेकिन फिर अब तक इसपर अमल नहीं किया जा रहा है.

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जिल्हा अधिकारी और जिला पुलिस अधीक्षक भी इसमे कुछ कर नहीं पा रहे है, ये भी एक बड़ी बात है. पर फिर भी गाँव के लोगों ने हार नहीं मानी. फिर एक बार जिल्हाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को आवेदन देने का सोचा गया है.

शराब पर प्रतिबंध नहीं तो गाँव बंद और रास्ता रोको आंदोलन होगा
सरपंच और कार्यकर्ता

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शराब पर प्रतिबंध नहीं तो गाँव बंद और रास्ता रोको आंदोलन होगा

अगर इस आवेदन के बाद जिल्हाधिकारी और पुलिस निरीक्षक ने कोई कार्यवाही नहीं की, तो फिर उसके तुरंत बाद सभी गाँववासी मिलकर पूरा गाँव बंद और रास्ता रोको आंदोलन करने का तय हुवा.  सभा में और कई समस्याओं के बारे में भी सभा में बात की गई. लेकिन महत्त्व शराब प्रतिबंध इसी बात पर था. कई दिनों से गाँव के लोग पुलिस, शासन, जिल्हाधिकारी और राजनेताओं से मिलकर उनके सामने ये प्रस्ताव रख रहे है लेकिन उसके बावजूद अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है.

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माना जा रहा है की अगर अब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो तब तक गाँव बंद रहेगा जब तक कोई कार्यवाही नहीं होती. दूसरी बात ये है की जो कोई शराब बेच रहा है, या जो कोई इसका भागीदार है उसपर गाँववालों की तरफ से बहिष्कार डाल दिया जाएगा.

शराब पर प्रतिबंध नहीं तो गाँव बंद और रास्ता रोको आंदोलन होगा

कब मिलेगा इन्साफ़?

ये एक पहला ऐसा गाँव है जहा गाँव वाले प्रतिबंध तो लगाना चाह रहे है, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध कर रहे है. शर्म की बात है की जिल्हा पुलिस, जिल्हा अधिकारी और कई हजार लोगों की बात कुछ चुनिंदा लोग सुन नहीं रहे है और आज भी कई जगह ये शराब का व्यवसाय चल रहा है.

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शराब की वजह से गाँव के कई युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो चुकी है. कई लोगों के परिवार रास्तेपर है. कई परिवार ऐसे है की जिसमे छोटे छोटे बच्चो के बाप शराब पिने की वजह से मर रहे है. फिर भी अब तक इस पर रोक नहीं लगा है. व्यवसाय करने वाले व्यवसाय कर रहें है और मरने वाले मर रहे है.

क्या अब गाँव का कोई समझदार इंसान इसमें कोई दखलंदाजी नहीं करेगा? क्यों? क्यों की इस वजह से उनके वोट बट जाएंगे. बस इन्ही कुछ कारनों की वजह से कई गाँव में ऐसा ही चल रहा है.

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