मोदी को गुजरात दंगो से नहीं मिलेगी क्लीन चिट?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगा केस से क्लीन चित मिल चुकी थी, लेकिन उसके पर याचिका दाखल की गई थी उसकी आज सुनवाई है. इस मामले में जकिया जाफरी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. 2002 के गुजरात दंगों के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दिए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. देखा जाए तो मोदी को क्लीन चिट मिलाने के बाद इस सब का कोई मतलब नहीं बनाता है लेकिन आज पूरी तरह मोदी इस गुजरात दंगा मामले से बाहर हो जाएंगे.

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मोदी को गुजरात दंगे से नहीं मिलेगी क्लीन चिट?

कैसे और कब मिली मोदी को क्लीनचिट

२००८ में सुप्रीम कोर्ट की ही गठित एसआइटी ने विगत आठ फरवरी, २०१२ को मामले की क्लोजर रिपोर्ट दायर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ५९ अन्य लोगों को यह कहते हुए क्लीनचिट दी थी कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने योग्य कोई सुबूत नहीं हैं. इसके बाद २०१० में एसआइटी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी से नौ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी.

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पूरी पूछताछ और जानकारी लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नौ फरवरी, २०१२ को जकिया जाफरी और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस’ ने एसआइटी की रिपोर्ट को निचली मेट्रोपोलिटन अदालत में चुनौती दी थी. उन्होंने मोदी और अन्य पर दंगे के पीछे आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाने की मांग की. लेकिन दिसंबर, २०१३ में निचली अदालत ने एसआइटी की रिपोर्ट को सही ठहराया. और नरेंद्र मोदी और अन्य ५९ को क्लीनचिट दी गई.

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उसके बाद जकिया जाफरी और तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की. यहां भी विगत तीन जुलाई, 2017 को जाफरी के वकीलों ने दलील दी कि निचली अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया. और घटना में साजिश बताने वाले गवाहों के हस्ताक्षरित बयानों पर विचार नहीं किया. लेकिन पिछले ही साल हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा.

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मोदी को गुजरात दंगे से नहीं मिलेगी क्लीन चिट?

गुजरात दंगे में मारे गए पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने याचिका खारिज करने की अपील की.

जकिया ने पांच अक्टूबर, २०१७ के गुजरात हाईकोर्ट के इस फैसले को भी खारिज करने की अपील की है. पिछले साल गुजरात हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त एसआइटी की जांच रिपोर्ट में पीएम मोदी और ५९ अन्य को क्लीनचिट दिए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए २००२ के गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में जाकिया जाफरी की याचिका को खारिज कर दिया था. साथ ही उन्हें आगे की जांच के लिए सर्वोच्च अदालत में जाने को निर्देशित किया था.

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संक्षिप्त सुनवाई के दौरान जाफरी के वकील सीयू सिंह ने २७ फरवरी, २००२ और मई २००२ के बीच व्यापक साजिश के संबंध में नोटिस जारी करने की अपील की. वहीं, गुजरात सरकार के वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि यह अलग मामला है और इसे अन्य आपराधिक अपीलों के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है. उन्होंने नोटिस जारी किए जाने की दलील का भी विरोध किया. इसके बाद जस्टिस एएम खानविल्कर और दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने गुजरात दंगे में मारे गए पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि खंडपीठ ने अभी तक याचिका को विस्तार से नहीं देखा है. इसलिए इस मामले की सुनवाई १९ नवंबर मतलब आज होगी. खंडपीठ ने कहा कि संभवत: आफिस रिपोर्ट में रजिस्ट्री की ओर से गलत जानकारी दी गई है.

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