डिलिवरी के वक्त बच्चे को खींचने से हुए दो टुकड़े.

राजस्थान के जैसलमेर में गर्भ के अंदर एक बच्चे के दो टुकड़े होने के मामले में नई जानकारियां सामने आई हैं. राजस्थान से छपने वाले अखबारों में घटना की परेशान करने वाली जानकारियां छपी हैं. दैनिक भास्कर और पत्रिका में छपी रिपोर्ट्स के आधार पर हम आपको सिलसिलेवार ढंग से बताएंगे कि उस दिन असल में क्या हुआ था और प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई हुई.

सरकार ने क्या किया है?

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने जैसलमेर के स्वास्थ्य और पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है. आयोग इस मामले में 11 फरवरी को सुनवाई भी करने वाला है.

राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति बना दी है और उच्च अधिकारियों को जैसलमेर जाने को कहा गया है. पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 ए और 336 में मामला दर्ज किया है और अस्पताल के स्टाफ से पूछताछ की है. बच्चे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस गिरफ्तारियां करेगी. फिलहाल अृमत राम और जुझार सिंह को सस्पेंड किया गया है. अस्पताल के डॉक्टर निखिल शर्मा हेडक्वार्टर अटैच कर दिया गया है.

दैनिक भास्कर ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखने का दावा किया है. अखबार ने रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि बच्चे के पैर इतनी ज़ोर से खींचे गए कि उसके पैरों की हड्डियों में फ्रेक्चर आ गए और उसका लीवर तक फट गया.

डिलिवरी के वक्त बच्चे को खींचने से हुए दो टुकड़े.

कंपाउंडर क्या कह रहे हैं?

कंपाउंडर अमृतराम अब भी इस बात पर कायम है कि परिजनों के कहने और मानवता के नाते प्रसव कराने की कोशिश की थी. जब अकेले नहीं कर पाए तो जूंझारसिंह को बुलाया और फिर से कोशिश की. इसी में बच्चे का धड़ बाहर आ गया और सिर अंदर ही रह गया. मरीज को जैसलमेर रैफर करने के दौरान परिजनों को नवजात का धड़ ले जाने का कहा था, लेकिन उन्होंने कहा था कि बाद में ले जाएंगे.

ब्रीच बर्थ था ये

बच्चा जब जन्म लेता है तो पहले उसका सिर मां के शरीर से बाहर आता है. लेकिन कुछ मामले ऐसे होते हैं, जब प्रसव के दौरान बच्चे के पैर पहले बाहर आने लगते हैं. डॉक्टरों की कोशिश रहती है कि बच्चे को जन्म से पहले सीधा कर लिया जाए. जब ऐसा नहीं हो पाता, तब डिलिवरी के दौरान बच्चे के पैर पहले बाहर आते हैं. अंग्रेज़ी में इसे ब्रीच बर्थ कहा जाता है.

क्या हुआ था उस दिन?

6 जनवरी, 2019 की रात 11 बजे रामगढ़ में रहने वालीं दीक्षा कंवर को डिलिवरी के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया. दीक्षा के सात महीने पूरे हुए थे. अमृतराम और जुंझारसिंह ने प्रसव कराने की कोशिश की. इस दौरान बच्चे का शरीर तो बाहर आ गया लेकिन सिर अंदर ही रह गया. इसके बाद दीक्षा को जैसलमेर रेफर कर दिया गया. अस्पताल को खबर गई थी कि डिलिवरी हो गई है, सिर्फ प्लेसेंटा बाहर आना बाकी है. जब जैसलमेर के डॉक्टर दीक्षा की मदद नहीं कर पाए तो उन्होंने उसे जोधपुर रेफर किया. जोधपुर में दीक्षा की सोनोग्राफी हुई जिसमें मालूम चला कि गर्भ में सिर रह गया है. जोधपुर में डॉक्टरों की एक टीम ने दीक्षा की नॉर्मल डिलिवरी करवाई और सिर बाहर आया.

दीक्षा के घर वालों का कहना है कि उन्हें रामगढ़ में नहीं बताया गया था कि बच्चे के शरीर के दो हिस्से हो गए हैं और धड़ की डिलिवरी हो गई है. उन्हें जोधपुर में जाकर ये बात मालूम चली. इसके बाद दीक्षा के घर वाले रामगढ़ पुलिस थाने पहुंचे थे, जिसके बाद बच्चे का धड़ दिया गया.

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