केदारनाथ / प्रलय में छुपी एक प्रेम कथा

सारा अली खान और सुशांत सिंह राजपूत स्टारर फिल्म केदारनाथ रिलीज हो गई है. फिल्म रिलीज से पहले काफी विवादों में रही लेकिन अब फाइनली यह सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है. फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक कपूर हैं जो कि रॉक ऑन,काई पो चे और फितूर जैसी फिल्में बना चुके हैं. फिल्म से सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान डेब्यू कर रही हैं.

स्टार रेटिंग 4/5
स्टारकास्ट सारा अली खान, सुशांत सिंह राजपूत 
डायरेक्टर अभिषेक कपूर
प्रोड्यूसरप्रज्ञा कपूर, अभिषेक कपूर और रॉनी स्क्रूवाला
संगीतकारअमित त्रिवेदी
गीतकारअमिताभ भट्टाचार्य
गायक अरिजीत सिंह, निकिता गांधी,अमित त्रिवेदी
जॉनर लव स्टोरी, ड्रामा
रनिंग टाइम 116 मिनट

जानिए कैसी है फिल्म 

स्टोरी

मंदाकिनी उर्फ़ मुक्कू (सारा अली खान) एक तेज तर्राट लड़की है जो कि अपने परिवार के साथ केदारनाथ में रहती है. उसके पिता (नितीश भारद्वाज) वहां पंडित हैं. कहानी में मोड़ तब आता है जब मुक्कू एक मुस्लिम लड़के मंसूर (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार कर बैठती है जो कि केदारनाथ के यात्रियों को दर्शन कराने का काम करता है और पिट्ठू है. दोनों की प्रेम कहानी से तनाव उत्पन्न हो जाता है और इसी बीच केदारनाथ में भीषण बाढ़ आ जाती है.

क्या ये दो प्रेमी एक हो पाते हैं या फिर हमेशा के लिए बिछड़ जाते हैं,फिल्म की कहानी इसी के इर्द-गिर्द बुनी गई है. कहानी के लिहाज से फिल्म में नयापन नहीं है लेकिन 2013 में हुई केदारनाथ की त्रासिदी के बैकड्रॉप में फिल्माए जाने की वजह से इसमें नयापन दिखता है. फिल्म के स्क्रीन प्ले में कुछ खामियां भी हैं लेकिन कुछ ड्रामेटिक स्थितियां उत्पन्न कर इसे संभाल भी लिया जाता है.

डायरेक्शन 

डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने कहानी के साथ न्याय किया है. उन्होंने इसमें नयापन लाने की भरपूर कोशिश की है इसलिए इसे सिर्फ पूरी प्रेम कहानी न दर्शाते हुए केदारनाथ के कमार्शियलाइजेशन, होटल और मॉल बनने की वजह से वहां के इकोलॉजिकल बैलेंस बिगड़ने और फिर त्रासदी आने की बढ़ती संभावना को भी दिखाया है जो कि एक अच्छी सोच है. सिनेमटोग्राफर तुषार कांति राय ने केदारनाथ की खूबसूरत लोकेशंस को बेहतरीन तरीके से कैप्चर किया है. साथ ही भयानक बाढ़ के दृश्य भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी साबित हुए हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो फिल्म एक बार देखने लायक है.

एक्टिंग

पूरी फिल्म में सारा अली खान बाकी एक्टर्स के मुकाबले अलग ही स्टेंड आउट कर जाती हैं. डेब्यू परफॉरमेंस होने के बावजूद वह फिल्म में बेहद कॉन्फिडेंट लगी हैं. उनकी एक्टिंग में स्पार्क है जो आपको फिल्म से बंधे रहने के लिए मजबूर कर देता है. यह पूरी तरह से उनकी ही फिल्म साबित होती है. सुशांत सिंह राजपूत और नितीश भारद्वाज का काम भी अच्छा है.

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