‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ पढ़ें 10 ख़ास बातें.

एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर – एक ग़ैर राजनीतिज्ञ व्यक्ति, अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर ने भारतीय राजनीति में प्रवेश कर देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाकर दिखा दिया था.
एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आधारित फिल्म ‘द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ बनने के समय से ही चर्चा में रही है. फिल्म आज 11 जनवरी 2019 को रिलीज हो रही है ऐसे में मनमोहन के प्रधानमंत्री कार्यकाल के किस्से फिर चर्चाओं में हैं. हम बताने जा रहे हैं मनमोहन सिंह की वो खास बातें, जिन्हें कम ही लोग जानते होंगे.

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2. मनमोहन सिंह का जन्म पंजाब के गाह गांव (वर्तमान में पाकिस्तान में) में हुआ था. विभाजन के बाद इनका परिवार भारत आ गया था. पंजाब विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन की. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की. और फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल किया. इंग्लैंड में इन्हें इकॉनोमिक्स का एडम स्मिथ पुरस्कार भी मिल चुका है. इंडिया आकर अमृतसर के एक कॉलेज में पढ़ाने लगे. वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्राध्यापक रहे.

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3. 1971 में मनमोहन को भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मन्त्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया. 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया. फिर योजना आयोग के उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमन्त्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे. 1991 से 96 तक वित्त मन्त्री रहे.

4. जब नरसिम्हा राव ने इन्हें वित्त मन्त्री बनाया, तब भारतीय अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई हुई थी. देश के पास इतना पैसा नहीं था कि अर्थव्यवस्था संभल जाए. नए आर्थिक नियम लाने में डर भी था. राव का कहना था, सुधार सफल हुए तो श्रेय सरकार को मिलेगा, नहीं हुए तो मनमोहन के माथे पड़ेगा. पर सुधार सफल हुए थे. इस बात का ज़िक्र जयराम रमेश की किताब ‘To The Brink & Back’ में है.

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5. मनमोहन मई 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री रहे. प्रधानमंत्री के कार्यकाल में 2005 में इंडिया-ASEAN मीटिंग में मलेशिया में मनमोहन का परिचय दुनिया के सबसे ज्यादा शिक्षित प्रधानमंत्री के रूप में हुआ था.

6. मनमोहन के कार्यकाल में कुछ बड़े एक्ट और डील पास हुईं जो कि जनता के हक में थी. उन एक्ट/डील पास होने के चलते खुद उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. मनमोहन सिंह के सत्ता में आने के बाद 2005 में कंज्यूमर और RTI एक्ट पास हुआ. 2006 में मनरेगा एक्ट आया. मनरेगा एक्ट सरकार द्वारा लोगों को उनके गांव के पास रोजगार दिलाने के बारे में था. 2008 में सिविल न्यूक्लियर डील हुई. मनमोहन द्वारा इस डील को पूरा करना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर बड़ी जीत मानी गई थी. 2013 में पास हुए फ़ूड सिक्यूरिटी बिल से जनता का खाना सुरक्षित करवाना मनमोहन सरकार की अच्छी कोशिश मानी गई थी.

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7. क्या आपको पता है? 10 साल के कार्यकाल में मनमोहन सिंह ने एक भी दिन छुट्टी नहीं ली थी. ये बात एक आरटीआई के जवाब में 10 फरवरी 2017 को सरकार ने बताई थी. दरअसल संविधान में प्रधानमंत्री की छुट्टी का कॉन्सेप्ट ही नहीं है. यानी देश का प्रधानमंत्री किसी भी हाल में हर वक़्त ड्यूटी पर होता है.

8. मनमोहन को भारत के आर्थिक सुधारों का प्रणेता माना जाता है. उन्होंने आयात और निर्यात को भी सरल बनाया. लाइसेंस एवं परमिट गुज़रे ज़माने की चीज़ हो गई. उस दौरान विपक्ष उन्हें नए आर्थिक प्रयोग से सावधान कर रहा था. लेकिन मात्र दो वर्ष बाद ही आलोचकों के मुंह बंद हो गए थे.

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9. भारतीय अर्थव्यवस्था के मद्देनज़र मनमोहन के लिए फैसलों से जब जब उदारीकरण के बेहतरीन परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था में नज़र आए तो कहा गया कि एक ग़ैर राजनीतिज्ञ व्यक्ति, अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर ने भारतीय राजनीति में प्रवेश कर देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाकर दिखा दिया.

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10. कहा जाता है कि अमेरिका के साथ हुई न्यूक्लियर डील के समय मनमोहन ने जबरदस्त कमिटमेंट दिखाया था. लेकिन ये भी कहा जाता है कि वे प्रधानमंत्री होते हुए कभी राजनेता नहीं बन पाए. मनमोहन के बारे में ये बात काफी मशहूर है कि उन्होंने हमेशा कहा, ‘मैं जो कुछ भी हूं, अपनी पढ़ाई-लिखाई की वजह से हूं.’ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली में 28 दिसंबर को अपनी पुस्तक ‘चेंजिंग इंडिया’ के विमोचन पर उन्होंने कहा, ‘एक्सीडेंटल प्रधानमंत्री के साथ ही मैं देश का एक्सीडेंटल वित्त मंत्री भी था.

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